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कर्म करक किसे कहते हैं - karm karak kise kahate hain

कर्म करक किसे कहते हैं

वाक्य में जिस शब्द पर क्रिया (action) का सीधा प्रभाव पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। अर्थात जिस पर काम किया जाता है, वही कर्म होता है।

सरल शब्दों में: क्रिया का असर जिस पर पड़े → वही कर्म कारक

कर्म कारक की पहचान कैसे करें?

किसी भी वाक्य में क्रिया (verb) से ये प्रश्न पूछें:

क्या? या किसे?

जो उत्तर मिलता है, वही कर्म कारक होता है।

उदाहरण (Examples)

1. राम ने फल खाया।
→ राम ने क्या खाया? → फल (कर्म कारक)

2. सीता ने किताब पढ़ी।
→ सीता ने क्या पढ़ी? → किताब (कर्म कारक)

3. मैंने उसे बुलाया।
→ मैंने किसे बुलाया? → उसे (कर्म कारक)

4. शिक्षक ने छात्रों को समझाया।
→ शिक्षक ने किसे समझाया? → छात्रों को (कर्म कारक)

कर्म कारक के चिन्ह

कर्म कारक के साथ अक्सर "को" का प्रयोग होता है, जैसे:

मैंने राम को बुलाया।
उसने बच्चों को सिखाया।

लेकिन हर बार "को" जरूरी नहीं होता:

मैंने पानी पिया।
उसने खाना बनाया।

कर्म कारक और कर्ता में अंतर

कर्ता वह होता है जो काम करता है।
कर्म वह होता है जिस पर काम होता है।

उदाहरण:

राम ने किताब पढ़ी।
राम = कर्ता (काम करने वाला)
किताब = कर्म (जिस पर काम हुआ)

ध्यान रखने वाली बातें

• हर वाक्य में कर्म होना जरूरी नहीं होता।
• कुछ क्रियाएँ ऐसी होती हैं जिनमें कर्म नहीं होता (जैसे: सोना, हँसना)।
• कर्म कारक हमेशा क्रिया से जुड़ा होता है।

कर्म कारक के 10 उदाहरण

नीचे दिए गए वाक्यों में जिस शब्द पर क्रिया का प्रभाव पड़ रहा है, उसे कर्म कारक के रूप में दिखाया गया है:

1. राम ने सेब खाया।
→ क्या खाया? → सेब

2. सीता ने किताब पढ़ी।
→ क्या पढ़ी? → किताब

3. मैंने पानी पिया।
→ क्या पिया? → पानी

4. शिक्षक ने छात्रों को पढ़ाया।
→ किसे पढ़ाया? → छात्रों को

5. उसने गेंद फेंकी।
→ क्या फेंकी? → गेंद

6. माँ ने खाना बनाया।
→ क्या बनाया? → खाना

7. मैंने दोस्त को बुलाया।
→ किसे बुलाया? → दोस्त को

8. बच्चे ने खिलौना तोड़ा।
→ क्या तोड़ा? → खिलौना

9. उसने पत्र लिखा।
→ क्या लिखा? → पत्र

10. पुलिस ने चोर को पकड़ा।
→ किसे पकड़ा? → चोर को

कर्म कारक की परिभाषा

कर्म कारक वह होता है जिस पर वाक्य की क्रिया (action) का सीधा प्रभाव पड़ता है। अर्थात जिस पर काम किया जाता है, उसे कर्म कहते हैं। वाक्य में क्रिया से “क्या?” या “किसे?” प्रश्न पूछने पर जो उत्तर मिलता है, वही कर्म कारक होता है, जैसे— “राम ने फल खाया” में “फल” कर्म कारक है क्योंकि खाने की क्रिया का प्रभाव उसी पर पड़ रहा है।